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साथ

कई बार सोचा क्यों सोचा था हमने साथ रहना  भावनाओं में कहीं हमने शुरू तो नहीं किया साथ रहना  कई दिन बीत गये सोचा अब तो सब ठीक होगा  मालूम ही नहीं हुआ ग़लतियाँ अभी बाक़ी है और होना  जानता हूँ सब ठीक होगा वक़्त के साथ  पर क्या मैं रहूँगा उस वक़्त उस वक़्त के साथ  बीत रही है ज़िंदगी समय भी बीत रहा है  अब भी बस यही सोच रहा हूँ क्या होगा साथ रहना