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Showing posts from March, 2021

होली के रंग

इन रंगो के इस उत्सव पर, आओ प्रेम में रंग जाएँ भूल जाएँ सब चिंता जीवन की, खुद को खुद में ढूँढ आएँ आओ बचपन फिर से जी लें, क्या रखा है इस जवानी में जीवन के इस मोड़ पर आकर, बचपन की अँगड़ायी लें इस होली में खुद को रंग कर, भूल जाएँ की कुछ ग़म हैं याद करें बस इतना ही की, ख़ुशियाँ हैं तो हीं हम हैं जीवन तो इतना छोटा है, ख़ुशियों का भी वक्त नहीं  ग़म की गठरी लेकर बैठें, ऐसा कोई दरख़्त नहीं इस होली में आओ बैठकर भूल जाएँ की कुछ ग़म हैं ग़म ख़ुशी तो संग भाई हैं कौन भला किससे कम हैं हैं व्यस्त सभी अपने जीवन में, किसने किसको देखा है होता है वही जीवन में, जो उपरवाले ने लेखा है

मंज़िलों की दौड़

इन मंज़िलों की दौड़ में ये कहाँ आ गए हम, जिस मोड़ से चले थे फिर वहीं आ गए हम  मंज़िलें तो पता थी और रास्ते भी पता थे, ना जाने किस वजह से यूँ रास्ते भटक गए हम  अतीत से मिलकर अपने वर्तमान में देखा, तो भविष्य की गहराइयों से मिलने लगा कुछ और ग़म हमने तो ऐसी कोई दुआ भी नहीं थी माँगी, की ख़ुशियों को ढूँढते हुए सबसे जुदा  हो गए हम  इस दौड़ के सफ़र में जो साथी मिलते गए, उनकी यादों को तो कब से यूँ भूल भी गए हम  फिर क्यूँ आज भी उन पलों को, उन यादों को महसूस करते रहे हम  जब हमारे वर्तमान ने भविष्य की ख़ुशियों भरा दामन, क्यूँ आज भी अतीत में हैं जी रहें हैं हम  क्यूँ है ये हिचकिचाहट, क्यूँ है मन में ये डर, जब है अपनों का साथ, हैं अपनों के साथ हम  क्यूँ है ये सन्नाटा, ये दूरियाँ दिलों में, जब मन में हैं अथाह प्रेम और प्रेम में हीं हैं हम  क्यूँ दूर नहीं कर सकते अपने दिल कि मैल को, जब जानते हैं उत्तर हैं खुद में हम क्यूँ बंद है बातों का वो सफ़र, वो ख़ुशियों का साथ मनाना, जब जानते हैं की सबके बिना कभी खुश हीं नहीं थे हम  क्यूँ बंद है अपने बातों के सफ़र ...

प्रेम

दूरियों से नजदीकी और नजदीकियों से दूरियां, कौन कहता है प्रेम में जरूरी हैं शब्दों की बारीकियां प्रेम तो वो है मनुष्य को निःशब्द कर देता है, अन्यथा कैसे एक अजन्मे के प्रति मां को प्रेम का आधार बना देता है प्रेम तो वो है जो दूर होकर भी नजदीक आने का कारण बना  देता है, अन्यथा कैसे पिता के काम से बाहर होने पर भी बच्चों की हर जरूरत का मददगार बना देता है प्रेम वो नही जो एक पुरुष एक स्त्री से एक बंद कमरे में कर लें, प्रेम तो वो है जो हजार बंदिशों में भी उन्मुक्त गगन की सैर एक साथ कर लें प्रेम वो नहीं जो शब्दों का मोहताज हो, प्रेम तो वो है जहां बिना शब्दों के हीं सिर्फ नजरों से बात हो प्रेम वो भी नहीं जहां सिर्फ पाने की चाहत हो, प्रेम तो वो है जहां खुद को खोकर भी सब कुछ पा लेने की चाहत हो प्रेम वो भी नहीं जहां सिर्फ़ अपनों के साथ ख़ुशियों में रहें, प्रेम तो वो है जहां दूर होकर भी दुःख में भरोसा साथ रखें  प्रेम वो भी  नहीं जो बाज़ार की चकाचौंध से ख़रीद लाएँ, प्रेम तो वो है जो अंधेरे में भी उस रोशनी का सिर्फ़ एहसास दे जाए    

मौसम और इबादत

आज फिर से ये मौसम कुछ कह गया हमसे अपनी मोहब्बत की हकीकत बयां कर गया हमसे हमने पूछा उस मौसम से कैसे रहें इतने दिन दूर हमसे वो अपनी तन्हाइयों में की गई इबादत बता गया हमसे हमने भी सीख लिया इस इबादत के मरहम को अपने होठों पे लगाना जब इस मौसम ने अपने इश्क की कहानी को बता गया हमसे

ख़ुशियों की सौग़ात

मंज़िलों की बात भी क्या बात होती है  जब दिल में हो उम्मीद तो उम्मीदें ही साथ होती हैं  बस एक कदम तुम मेरे साथ तो चलकर तो देखो जीवन में कैसे सिर्फ़ ख़ुशियों की सौग़ात होती है 

इतिहास की यादें

इतिहास में वक्त और वक्त में इतिहास दबा है  बीते डीनो की यादों ने भला किसका भला किया है  इंसान तो वक्त का पुतला है इसे वर्तमान में रहने दो भविष्य की गहराइयों में जाकर भला किसको क्या मिला है 

थोड़ी सी पहचान थोड़ी सी मोहब्बत

थोड़ी पहचान से ही पूरी मुलाक़ात होती है  किसी की बात से बातों की शुरुआत होती है  शुक्रिया आपका हमारी मुस्कान को खुश रखने के लिए  वरना हमारी तो बातें भी खुद से खुद की ही होती है  मुलाक़ातों की बात भी क्या बात है  आज हम हैं कल आपका साथ है  बस यही एक भरोसा और यही विश्वास है  मोहब्बत हुई और बस अब इसी की जीवनभर आस है