होली बिन हंसी ठिठोली
कुछ याद करो बचपन में सबके साथ मनायी होली, सोचो कैसे बीत रही है इस घर में बिना हँसी और बिना ठिठोली
कितने जतन से संजोए होंगे वो सपने मन में, एक समय आएगा जब सब साथ मनाएँगे ये होली
आज समय आया है तब सब अपनी सोच में सब मस्त हैं, बिना तुम्हारे रंग गुलाल के क्यूँ बनाएँ होली
क्या जीवन है इतना छोटा यूँ अकेले ये कट जाएगा, या लम्बे जीवन में ऐसे ही यूँ मनानी है ये होली
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