मौसम और इबादत

आज फिर से ये मौसम कुछ कह गया हमसे

अपनी मोहब्बत की हकीकत बयां कर गया हमसे

हमने पूछा उस मौसम से कैसे रहें इतने दिन दूर हमसे

वो अपनी तन्हाइयों में की गई इबादत बता गया हमसे

हमने भी सीख लिया इस इबादत के मरहम को अपने होठों पे लगाना

जब इस मौसम ने अपने इश्क की कहानी को बता गया हमसे










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