होली के रंग

इन रंगो के इस उत्सव पर, आओ प्रेम में रंग जाएँ
भूल जाएँ सब चिंता जीवन की, खुद को खुद में ढूँढ आएँ

आओ बचपन फिर से जी लें, क्या रखा है इस जवानी में
जीवन के इस मोड़ पर आकर, बचपन की अँगड़ायी लें

इस होली में खुद को रंग कर, भूल जाएँ की कुछ ग़म हैं
याद करें बस इतना ही की, ख़ुशियाँ हैं तो हीं हम हैं

जीवन तो इतना छोटा है, ख़ुशियों का भी वक्त नहीं 
ग़म की गठरी लेकर बैठें, ऐसा कोई दरख़्त नहीं

इस होली में आओ बैठकर भूल जाएँ की कुछ ग़म हैं
ग़म ख़ुशी तो संग भाई हैं कौन भला किससे कम हैं

हैं व्यस्त सभी अपने जीवन में, किसने किसको देखा है
होता है वही जीवन में, जो उपरवाले ने लेखा है

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